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Tuesday, 1 November 2016

All about PM Narendra Modi......Ratnesh Yadav

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री “नरेन्द्र मोदी जी” आज भारत के सबसे ज्यादा चर्चित व्यक्ति हैं। केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनके नाम के अनेकों प्रसंशक हैं।

         माननीय नरेन्द्र दामोदरदास मोदी (पूरा नाम) भारत के 15 वें प्रधानमंत्री हैं एवं ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म स्वतंत्र भारत (यानि 1947 के बाद) में हुआ।

          नरेन्द्र मोदी जी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को गुजरात के मेहसाना जिले में वडनगर नाम के कस्बे में हुआ। पिता दामोदर दास मोदी और माँ हीराबेन के 6 बच्चों में से ये तीसरे नंबर के थे। इनके घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। माँ दूसरों के घर में जाकर बर्तन साफ़ करती थी और पिता की एक छोटी सी चाय की दुकान थी। एक कच्चे मकान में पूरा परिवार रहता था। गरीबी के कारण दो वक्त का खाना भी सही से नसीब नहीं होता था। संघर्ष भरे माहौल में मोदी जी ने बहुत छोटी उम्र में ही जीवन के कई ऊँचे नीचे पड़ाव देख लिए थे। बचपन से ही इनको पढाई लिखाई का बेहद शौक था। यूँ तो ये पिता के साथ चाय की दुकान पर हाथ बंटाया करते थे लेकिन जब भी मौका मिलता ये पुस्तकालय जाकर घण्टों पढ़ाई करते। ये बचपन से ही स्वामी विवेकानंद एवं उनके विचारों को अपना आदर्श मानते थे। 13 वर्ष की आयु में नरेन्द्र की सगाई जसोदा बेन चमनलाल के साथ कर दी गयी। लेकिन कुछ पारिवारिक समस्याओं के कारण 1967 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही ये घर छोड़ कर चले गए। ये घर छोड़कर उत्तरी भारत में स्थित स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित हिन्दू आश्रम एवं कोलकाता के बेलूर मठ ऐसे ही कई आश्रामों का भृमण करने लगे। इन्हीं दिनों में इन्होंने जीवन को गहराई से जाना अपनी सोच को सुधारा और करीब 2 साल बाद फिर से वापस घर आ गए।

               इसके बाद मोदी जी आर.एस.एस. (R.S.S.) के सदस्य बने और पूरी मेहनत से आर.एस.एस. के लिए काम करने लगे। इतनी व्यस्तता के बावजूद मोदी जी पढाई करना नहीं छोड़ा और राजनीति विज्ञान में डिग्री प्राप्त की। वो दिन रात लोगों की सेवा करते लोगों से जुड़ते और उनकी समस्या को करीब से जानने की कोशिश करते।

             1975 में भारत में राजनैतिक झगडे चल रहे थे तो उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने कई राज्यों में आपातकाल घोषित कर दिया और आर.एस.एस. संस्था को बंद करने को कहा लेकिन मोदी जी फिर भी गुप्त रूप से लोगों की सेवा में लगे रहे और आर.एस.एस. का प्रचार चलता रहा। उनके इस काम से खुश होकर उनको भाजपा में शामिल किया गया।

              2001 में गुजरात में भयंकर भूकंप आया जिसकी वजह से गुजरात को बहुत नुकसान झेलना पड़ा। उस समय की सरकार के राहत कार्य से नाखुश होकर भाजपा वालों ने मोदी जी को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया। मोदी ने उस भूकंप से गुजरात को उबारने में जी तोड़ मेहनत की और वे सफल भी हो गये और लोकप्रिय हो गए। गुजरात की जनता ने भी उनको लगातार चार बार मुख्यमंत्री चुनकर भारत के सबसे बेहतर मुख्यमंत्रीयों में शामिल कर दिया।

            इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में भाजपा ने मोदी को उतारा और पूरे भारत में मोदी के नाम की लहार इतनी तेजी से दौड़ रही थी कि काफी लोगों ने पहले ही मोदी को प्रधानमंत्री मान लिया। खासकर युवाओं ने मोदी को विशेष प्रोत्साहन दिया।
           उनके नेतृत्व में भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा और 282 सीटें जीतकर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमन्त्री पद की शपथ दिलायी और आज वे स्वतन्त्र भारत के 15वें प्रधानमन्त्री हैं और कुशलता पूर्वक भारत की सेवा कर रहे हैं।

मोदी जी की कुछ प्रमुख योजनाएं –
धन योजना
स्वच्छ भारत अभियान
मेक इन इंडिया
डिजिटल इंडिया

मोदी जी के जीवन से जुडी कुछ दिलचस्प जानकारियां –
1. मोदी जी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म स्वतन्त्र भारत में हुआ
2. सोशल मिडिया पर सबसे ज्यादा पॉपुलर इंसान हैं मोदी जी
3. गुजरात की राजधानी गांधीनगर एशिया की Greenest Capital City में है
4. मोदी बचपन में पिता के साथ चाय बेचते थे
5. मोदी जी स्वामी विवेकानंद से बेहद प्रभावित हैं
6. मोदी बचपन से बहादुर थे एक बार मगरमच्छ का बच्चा हाथ में उठा लाये थे
7. बचपन से ही नाटकों और भाषणों में हिस्सा लेते थे
8. मात्र 13 साल की उम्र में इनकी शादी हो गयी थी
9. मोदी जी रोजाना योगा करते हैं फिर चाहे वो कहीं भी हों
10. वे रोजाना 18 घंटे काम करते हैं केवल कुछ ही घंटे सोते हैं
11. मोदी जी ने अपने 2 साल के कार्यकाल में अभी तक कोई छुट्टी नहीं ली है।

ऐसे हैं हमारे देश भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, आज हर बच्चा बच्चा मोदी जी को जानता है और युवाओं की वो हमेशा से ही पहली पसंद रहे हैं। तो आइये हम भी अपने वर्तमान प्रधानमंत्री को बढ़ावा दें और भारत को विश्व में उच्च स्थान दिलाने की कोशिश करें।

Sunday, 30 October 2016

असफलता सफलता से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है…..

एक रास्ता जो निश्चय सफलता की ओर जाता है..........द्वारा रत्नेश यादव

सभी के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब सभी चीज़ें आपके विरोध में हो रहीं हों | चाहें आप एक प्रोग्रामर हैं या कुछ और, आप जीवन के उस मोड़ पर खड़े होता हैं जहाँ सब कुछ ग़लत हो रहा होता है| अब चाहे ये कोई सॉफ्टवेर हो सकता है जिसे सभी ने रिजेक्ट कर दिया हो, या आपका कोई फ़ैसला हो सकता है जो बहुत ही भयानक साबित हुआ हो लेकिन सही मायने में, विफलता सफलता से ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है |
हमारे इतिहास मेंजितने भी बिजनिसमेन, साइंटिस्ट और महापुरुष हुए हैं वो जीवन में सफल बनने से पहले लगातार कई बार फेल हुए हैं | जब हम बहुत सारे कम कर रहे हों तो ये ज़रूरी नहीं कि सब कुछ सही ही होगा| लेकिन अगर आप इस वजह से प्रयास करना छोड़ देंगे तो कभी सफल नहीं हो सकते |

हेनरी फ़ोर्ड, जो बिलियनेर और विश्वप्रसिद्ध फ़ोर्ड मोटर कंपनी के मलिक हैं | सफल बनने से पहले फ़ोर्ड पाँच अन्य बिज़निस मे फेल हुए थे | कोई और होता तो पाँच बार अलग अलग बिज़निस में फेल होने और कर्ज़ मे डूबने के कारण टूट जाता| लेकिन फ़ोर्ड ने ऐसा नहीं किया और आज एक बिलिनेअर कंपनी के मलिक हैं |
            
अगर विफलता की बात करें तो थॉमस अल्वा एडिसन का नाम सबसे पहले आता है| लाइट बल्व बनाने से पहले उसने लगभग 1000 विफल प्रयोग किए थे |

अल्बेर्ट आइनस्टाइन जो 4 साल की उम्र तक कुछ बोल नहीं पता था और 7 साल की उम्र तक निरक्षर था | लोग उसको दिमागी रूप से कमजोर मानते थे लेकिन अपनी थ्ओरी और सिद्धांतों के बल पर वो दुनिया का सबसे बड़ा साइंटिस्ट बना |

अब ज़रा सोचो की अगर हेनरी फ़ोर्ड पाँच बिज़नेस में फेल होने के बाद निराश होकर बैठ जाता, या एडिसन 999 असफल प्रयोग के बाद उम्मीद छोड़ देता और आईन्टाइन भी खुद को दिमागी कमजोर मान के बैठ जाता तो क्या होता?
हम बहुत सारी महान प्रतिभाओं और अविष्कारों से अंजान रह जाते |

तो मित्रों, असफलता सफलता से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है…..

                                                    -रत्नेश यादव

असफलता का सबसे बड़ा कारण

हम कब फेल हो जाते हैं?
असफलता का सबसे बड़ा कारण

असफलता के कारण ( Asafalta Ke Karan)

कुछ दिनों पहले मैं संदीप माहेश्वरी का एक मोटिवेशनल विडियो देख रहा था। उसमे उन्होंने एक बड़ी ही अच्छी बात कही जो मैं यहाँ as it is quote कर रहा हूँ…

वो स्टेज पे खड़े हो कर कहते हैं —

आप imagine करो एक क्रिकट का match चल रहा है ….आप यहाँ पर batting कर रहे हो….ये लाइफ का गेम है क्रिकेट का गेम नहीं है ..
क्रिकेट से related है ,मैं आपको बस एक example दे रहा हूँ…लेकिन ये ज़िन्दगी है… आप यहाँ पर बैटिंग कर रहे हो….
पीछे कोई विकेट्स नहीं है…कोई विकेट कीपर नहीं है… कोई और प्लेयर्स नहीं हैं …
सामने से लाइफ है…ज़िन्दगी है …जो एक के बाद एक बॉल फेंकते चली जा रही है …
बॉल आ रही है …एक बॉल आई …..आपने बैट घुमाया …. बॉल छूट गयी…पीछे निकल गयी..
अब आप क्या करोगे ???
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ये गेम ऐसी है, जहाँ मैंने आपको कहा न… कोई विकेट्स नहीं हैं… कोई और प्लेयर नहीं है …. मतलब की आप चाहो भी तो भी ज़िन्दगी के खले में आउट नहीं हो सकते ….तब तक
जब तक कि आप खुद मैदान को छोड़ कर भाग नहीं जाते! दुनिया की कोई ताकत आपको हरा नहीं सकती अगर आप पिच पर डंटे रहो…”

कितनी सही और आसानी से समझ में आने वाली बात है ये। नहीं?
संदीप माहेश्वरी ने real life को क्रिकेट के example से समझाया और अब मैं आपको क्रिकेट
के ही example से रियल लाइफ को समझाने की कोशिश करता हूँ।
श्रीलंका का एक खिलाड़ी था, उसके दिमाग में बस एक ही चीज चलती थी…. क्रिकेट.क्रिकेट
और बस क्रिकेट… अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उसे श्री लंका की टेस्ट टीम में डेब्यू करने का मौका मिला….
पहली इन्निंग्स…… जीरो पे आउट
दूसरी इन्निंग्स……. जीरो पे आउट
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टीम से निकाल दिया गया….
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practice…practice….practice….
फर्स्ट क्लास मैचेज में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और एक 21 महीने बाद फिर से मौका मिला।
पहली इन्निंग्स…… जीरो पे आउट
दूसरी इन्निंग्स……. 1 रन पे आउट

फिर टीम से बाहर।
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प्रैक्टिस….प्रैक्टिस….प्रैक्टिस….
फर्स्ट क्लास मैचेज में हजारों रन बना डाले और 17 महीने बाद एक बार फिर से मौका मिला….
पहली इन्निंग्स…… जीरो पे आउट
दूसरी इन्निंग्स……. जीरो पे आउट
.
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फिर टीम से निकाल दिया गया….
.
प्रैक्टिस…प्रैक्टिस….प्रैक्टिस….प्रैक्टिस… प्रैक्टिस….प्रैक्टिस…
और तीन साल बाद एक बार फिर उस खिलाड़ी को मौका दिया गया…..जिसका नाम था

मर्वन अट्टापट्टू

इस बार अट्टापट्टू नहीं चूका उसने जम कर खेला और ….श्रीलंका की ओर से 16 शतक और 6 दोहरे शतक जड़ डाले और श्रीलंका का one of the most successful कप्तान बना!
सोचिये जिस इंसान को अपना दूसरा रन बनाने में 6 साल लग गए अगर वो इतना बड़ा कारनामा
कर सकता है तो दुनिया का कोई भी आदमी कुछ भी कर सकता है!
और कुछ कर गुजरने के लिए डंटे रहना पड़ता है…लगे रहना पड़ता है…मैदान छोड़ देना आसान होता है…मुश्किल होता है टिके रहना…और जो टिका रहता है वो आज नहीं तो कल ज़रूर सफल होता है।
इसलिए आपने जो कुछ भी पाने का निश्चय किया है उसे पाने की अपनी जिद मत छोडिये….अपने लक्ष्य को छोटा मत करिए…अपने focus को डाइवर्ट मत होने दीजिये….और ऐसा करना कोई पहाड़ नहीं है…
                                                       - रत्नेश यादव

Monday, 23 May 2016

जरुरी है दूसरों की मदद करना.....रत्नेश यादव

क्यों करु दूसरों की मदद क्या मिलेगा?
मेरी कौन मदद करता हैं?
मैंने ही सबका ठेका लिया है?
                                           ऐसी कई बाते बोलने व सुनने में आती हैं, जब दूसरों की मदद का सवाल उठता है । भूल जाते है कि यह और कुछ नहीं, इस धरती को अपने और दूसरो के लिए बेहतर बनाने की दिशा में बढ़ाए गए कदम हैं।
               महान अमेरिकी मुक्केबाज़ मोहम्मद अली से किसी ने पूछा कि हमे दुसरो की मदद क्यो करनी चाहिए? उन्होंने कहा, 'दूसरों की मदद करना धरती पर कमरे का किराया है जो आपको देना ही चाहिये ।'
    लाजवाब जवाब है । मकान में रहना है तो किराया तो देना ही पड़ता है । हालांकि यह धरती हमारी बनायी दुनिया की तरह हवा, पानी और मिट्टी का हिसाब नहीं रखती, बावजूद आप क्या हैं? और इस धरती पर क्यों हैं? इसे जानने का रास्ता अरसे तक दुसरो से अनजान रह कर नही पाया जा सकता । यह बात पाप - पुण्य, प्रसंसा और धार्मिक उपदेश की नहीं, हमारे अपने अस्तित्व को बनाये रखने की  शर्त है।

अनजान लोगो की मदद

जिटल लाइफ सोसोलोजिस्ट प्रोफेसर सेरी टरकल कहते है, ' गैजेट में उलझे रहने के कारण नई  पीढी की एक दूसरे से सीधी बात चित कम हो गयी है। लोग एक दूसरे से बात करते हुए मोबाइल देखते रहते है, जिससे उनकी खुद को और दुसरो को समझने की झमता कम हुई है।' यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन  में हुए शोध के अनुसार, 'हमारी अपनी खुसी के लिए जरुरी है की हम दुसरो से बातचीत करें।'

मदद का चक्र

बड़ी चर्चित कहानी है । एक किसान ने देखा की एक बच्चा दलदल में फंसा हुआ है । किसान ने उसे बचा लिया । अगले दिन उस बचचे के पिता ने किसान का सुक्रिया किया और अहसान के बदलें में कुछ देना चाहा । किसान ने कहा ,' यह तो मेरा कर्तव्य था। मैं कुछ ले नहीं सकता।'
      रईस ने वही खेलते हुए किसान के बच्चे को देखा । उसने पूछा की उसे पढाते क्यों नहीं ? रईस ने कहा की वह पढ़ाई का पूरा इंतज़ाम करने को तैयार है । बच्चा  पढ़ने लगा और महान् साइंटिस्ट अलेक्जेंडर फ्लेमिंग बना , उन्होंने पेंसिलीन की खोज की। समय आगे बढ़ा । उस रईस के बेटे को न्यूमोनिया हुआ और उस पेंसिलीन की वजह से उसकी जान बच पाई । रईस का यह बेटा सर विंस्टन चरचिल था । इंग्लैंड के चर्चित परधानमंत्री ।
   
मोटिवेशनल गुरु एकहार्ट टोल कहते है, 'हमारे अच्छे बुरे विचारो की तरह हमारे कामों का भी एक चक्र बनता है । हम जिनकी मदद करते है , उनमे से कुछ जरूर आगे दूसरों की मदद करते है । इस तरह मदद का एक चक्र चलता है । दुसरो पर भरोसा पैदा होता है ।' 
       
मदद के अनेक रूप
1. खाना बनाते समय कुछ खाना बनाकर किसी को खिलाना ।
2. अपनी किताबे व कपडे  दान देना ।
3. पंछियो को दाना पानी डालना ।
4. किसी जरूरतमंद को सलाह देकर उसके मेंटर बनना ।
5. धुप में चिठ्ठी व समान की डिलीवरी करने वालो, मजदूरो , सब्जीवलो से पानी के लिए पूछना ।
6. बुजुर्ग व बीमार की मदद करना।.............
                                                                                    रत्नेश यादव

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