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Saturday, 7 January 2017

Difference Between Right And Wrong.......Ratnesh Yadav

Difference Between Right And Wrong


Once many pupil from many parts of Japan came to attend seclusion weeks of meditation. During one of these gatherings One of them was caught stealing. Whole matter was reported to Bankei. All pupil requested Bankei to expel that person from gatherings but Bankei ignored the case.
Again that person was caught in similar act of stealing and again people demanded Bankei to detain that person from gatherings but Bankei refused.  Pupil who asked for dismissal of thief got angry and drew up a petition and stated that If the person who is stealing is not dismissed then all other people will leave the gathering.
This petition reached to Bankei. After reading petition he asked everyone to gather before him and said, “You are Wise Brothers. You know what’s right what’s wrong. You may go somewhere else to study if you wish but this brother doesn’t even know the difference between right and wrong. If i will not teach him then who will? I am going to keep him here even if you all leave.”
Tears came out of the person who had stolen and all desire to steal had vanished from his mind.

Moral:
If someone commits crime then sometimes we need to look deeper and we might just see that that person simply need to be shown right path. We also need to take time to teach them right and wrong.

खुद का परिक्षण ..........रत्नेश यादव

                                    खुद का परिक्षण 

एक छोटा लड़का टेलीफोन बूथ पर गया जो की स्टोर के कॅश काउंटर पर ही रखा था. वह लड़का टेलीफोन के पास गया और उसने वहा से एक नंबर लगाया.


उस टेलीफोन बूथ के दुकान का मालिक उसे देख ही रहा था और उसकी बाते भी सुन रहा था :
लड़का- “आंटी, क्या आप मुझे आपके घर के मैदान (लॉन) की सफाई करने का काम दे सकती हो?
महिला (जो फ़ोन में उस बच्चे से बात कर रही थी)- “हमारे पास पहले से एक लड़का काम कर रहा है जो मेरे लॉन की सफाई करता है और उसकी देखभाल भी करता है”
लड़का- “आंटी, मै आपके लॉन की सफाई और देखभाल उस लड़के से भी आधे पैसो में कर दूंगा.”

महिला- अभी जो मेरे लॉन की सफाई और देखभाल कर रहा है, मै उसी से बहोत संतुष्ट हु. वो अपना काम अच्छे से कर रहा है.
लड़का (इस बार उसने बड़ी लगन से कहा)- “आंटी, मै लॉन की सफाई और कटाई के साथ-साथ फर्श और सीढियों को भी साफ़ कर दूंगा, वो भी मुफ्त में.”
महिला- “नहीं, धन्यवाद !”
एक अच्छी सी मुस्कान के साथ ही उस लड़के ने फ़ोन रख दिया. ये सब स्टोर का मालिक सुन रहा था, इसीलिए वो जल्दी से उस लड़के के पास गया….
स्टोर मालिक- “बेटा….मुझे तुम्हारा रवैया पसंद आया, मुझे तुम्हारी सकारात्मक (पॉजिटिव) सोच पसंद आई और मै तुम्हे एक जॉब देना चाहूँगा.”
लड़का- “नहीं, धन्यवाद !“
स्टोर मालिक- “लेकिन कुछ समय पहले तो तुम इसी के लिए उस महिला से प्रार्थना कर रहे थे.”
लड़का- “नहीं सर, मै तो बस अपने काम की जांच कर रहा था, जो मै पहले से ही कर रहा हु. मै खुद उसी महिला के लिए मैदान (लॉन) की सफाई का काम करता हु जिस महिला से मै अभी बाते कर रहा था!”

                                       “इसी को खुद का परिक्षण कहते है” 

   

किसी भी काम को आप अपनी पूरी लगन और मेहनत से कीजिये तभी दुनिया आपकी तारीफ करेगी. आज के इस आधुनिक युग में इमानदार लोगो की बहोत कमी है, मेहनत करने वाले इमानदार लोगो की हमेशा से मांग होती है. चाहे कोई भी काम क्यू ना हो हमें उस काम में अपना 100% देना चाहिये. क्यू की आपका दिया हुआ 100% ही आपको जीवन में आगे बढ़ाने में मददगार साबित होता है.

Sunday, 1 January 2017

बदलाव ........रत्नेश यादव

                                  बदलाव 

जिन्दगी में बहुत सारे अवसर ऐसे आते है जब हम बुरे हालात का सामना कर रहे होते है और सोचते है कि क्या किया जा सकता है क्योंकि इतनी जल्दी तो सब कुछ बदलना संभव नहीं है और क्या पता मेरा ये छोटा सा बदलाव कुछ क्रांति लेकर आएगा या नहीं लेकिन मैं आपको बता दूँ हर चीज़ या बदलाव की शुरुआत बहुत ही  basic ढंग से होती है | कई बार तो सफलता हमसे बस थोड़े ही कदम दूर होती है कि हम हार मान लेते है जबकि अपनी क्षमताओं पर भरोसा रख कर किया जाने वाला कोई भी बदलाव छोटा नहीं होता और वो हमारी जिन्दगी में एक नीव का पत्थर भी साबित हो सकता है | चलिए एक कहानी पढ़ते है इसके द्वारा समझने में आसानी होगी कि छोटा बदलाव किस कदर महत्वपूर्ण है |
Ratnesh Yadav

           एक लड़का सुबह सुबह दौड़ने को जाया करता था | आते जाते वो एक बूढी महिला को देखता था | वो बूढी महिला तालाब के किनारे छोटे छोटे कछुवों की पीठ को साफ़ किया करती थी | एक दिन उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची |
          वो लड़का महिला के पास गया और उनका अभिवादन कर बोला ” नमस्ते आंटी ! मैं आपको हमेशा इन कछुवों की पीठ को साफ़ करते हुए देखता हूँ आप ऐसा किस वजह से करते हो ?”  महिला ने उस मासूम से लड़के को देखा और  इस पर लड़के को जवाब दिया ” मैं हर रविवार यंहा आती हूँ और इन छोटे छोटे कछुवों की पीठ साफ़ करते हुए सुख शांति का अनुभव लेती हूँ |”  क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचता जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए ये कछुवे तैरने में मुश्किल का सामना करते है | कुछ समय बाद तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते है इसलिए कवच को साफ़ करती हूँ |
        यह सुनकर लड़का बड़ा हैरान था | उसने फिर एक जाना पहचाना सा सवाल किया और बोला “बेशक आप बहुत अच्छा काम कर रहे है लेकिन फिर भी आंटी एक बात सोचिये कि इन जैसे कितने कछुवे है जो इनसे भी बुरी हालत में है जबकि आप सभी के लिए ये नहीं कर सकते तो उनका क्या क्योंकि आपके अकेले के बदलने से तो कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा न |

महिला ने बड़ा ही संक्षिप्त लेकिन असरदार जवाब दिया कि भले ही मेरे इस कर्म से दुनिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा लेकिन सोचो इस एक कछुवे की जिन्दगी में तो बदल्वाव आयेगा ही  तो क्यों न  हम छोटे बदलाव से ही शुरुआत करें |
                                                                                     रत्नेश यादव      

Saturday, 24 December 2016

The Power Of Belief ......by Ratnesh Yadav

Ratnesh Yadav

As a man was passing the elephants, he suddenly stopped, confused by the fact that these huge creatures were being held by only a small rope tied to their front leg. No chains, no cages. It was obvious that the elephants could, at anytime, break away from their bonds but for some reason, they did not.

He saw a trainer nearby and asked why these animals just stood there and made no attempt to get away. “Well,” trainer said, “when they are very young and much smaller we use the same size rope to tie them and, at that age, it’s enough to hold them. As they grow up, they are conditioned to believe they cannot break away. They believe the rope can still hold them, so they never try to break free.”


The man was amazed. These animals could at any time break free from their bonds but because they believed they couldn’t, they were stuck right where they were.
Like the elephants, how many of us go through life hanging onto a belief that we cannot do something, simply because we failed at it once before?

     Failure is part of learning; we should never give up the struggle in life.

                                                                              -Ratnesh Yadav

                                                                                                            view blog

Saturday, 10 December 2016

3 Keys of Success सफलता के तीन नियम...by RATNESH YADAV

3 Keys of Success
 सफलता के तीन नियम

By Ratnesh Yadav

यह अक्सर देखा

     या है की लोग पूछते रहते है की सफल कैसे हुआ जाये (How to become Successful)? या कौन-से तरीके है जिनको अपना कर हम सफल (Successful) हो सकते है? और कुछ सफल लोग बताते रहते है की वो कैसे सफल (Successful) हुए ।
यह कहने को तो अच्छा है लेकिन जरा ध्यान से देखे तो हम सब अपनी खुद की पहचान और प्रॉब्लम सोल्विंग दक्षता को खत्म कर रहे है ऐसा करके हम पूरी तरह से कुछ नियमों या तरीकों पर निर्भर हो जाते है ।
दरअसल हमारी सब की जिंदगी में सफलता के सारे नियम, तरीके छुपे हुए होते है पर दिक्कत तो यह है की हम सब लोग इतनी व्यस्तता वाली जिंदगी जी रहे होते है की उन पर हमारा ध्यान कभी नहीं जाता है ।
यकीन नहीं होता – चलो बात करते है किसी भी एग्जाम में अच्छे मार्क्स  कैसे लाये जाये,
मेहनत कर के? नहीं…
आपको पढ़ने के लिए मेहनत नहीं करनी आपको को तो अपनी समय बचत करने की आदतों पर जोर देना है जिससे आप थोड़ा समय ज्यादा निकाल लो पढ़ने के लिए, आपको खूब पढ़ने की बजाय रोजाना पढ़ने की आदत डालने की मेहनत करनी है  और ध्यान से पढ़ने की बजाय मजा लेकर पढ़ाई करनी है फिर देखते है कैसे अच्छे मार्क्स नहीं आते है । 🙂
इसी तरह जिंदगी के सभी पहलुओं पर ध्यान देंगे तो पाएंगे की अरे ये तो कितना आसान है यह तो मैं कर सकता हूँ, यह तो मैंने सोचा ही नहीं था, या फिर अरे मैं भी कितना पागल हूँ आइडिया मेरे पास था और मैं दुनिया से जानने की कोशिश में लगा रहा… आदि… आदि ।
यहाँ मैं कुछ नियम नहीं बताने वाला…
ये तो कुछ ऐसे कदम है जो आप करेंगे और पाएंगे की वाह… सच में जिंदगी जीना आसान है, सफल होना आसान है क्योंकि हम सब सफल होने के लिए प्रयासरत है और इसके लिए हर संभव कोशिश हम करते है ।
यदि बहुत प्रयासों के बाद भी सफल नहीं होते है तो अक्सर हिम्मत हार बैठते है और अपना विचार बदल लेते है, कुछ हालातों को जिम्मेदार मान लेते है और कुछ किस्मत को कुछ स्वंय को दोष देते रहते है पर इन सबके अलावा भी एक रास्ता है,
अगर थोड़ा सा बदलाव भी हम अपने सोचने के तरीके में कर लेते है तो उसके परिणाम सकारात्मक (Positive) ही आते है । चाहे कैसी भी परिस्थिति जिंदगी में क्यों न हो ये तीन कदम जरूर अपनाए ।

3 Keys to Success in Life 


रुको (Stop)

लगातार कोशिश करने के बावजूद भी सफलता न मिलना मतलब यह समय हमारी कोशिश को रोक देने का है जी हाँ – थोड़ा ब्रेक ले अपने रूटीन से,
बाहर प्राकृतिक जगहों पर घूमने जाये, परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिताये, अपने साथ वक्त बिताये, यह ठहराव आपको तरोताजा कर देगा और नयी उम्मीद देगा, ध्यान रहे यह ठहराव पूरी तरह से रुकने के लिए नहीं बल्कि नए सिरे से सोचने के लिए है ।

देखो (See)

जब हम थोड़ा रुकते है तो हमें अपनी जिंदगी की उन तमाम आदतों और कार्यों के बारे में सोचने का वक्त मिलता है और हमें देखना है की कौन-से तरीके काम नहीं कर रहे है, हमारी कौन-सी आदतें (Habits) है जो हमें रोक रही है,
और हमें कौन मदद कर सकता है क्या हम सही दिशा में जा रहे है या नहीं, हमारी अब तक की असफलता के कारण क्या है आदि यह आकलन हमें पूरी स्पष्टता दे देता है ।

बदलाव (Change)

आकलन के बाद अब वक्त आ गया है की उसके अनुसार नयी आदतें (Habits), नए तरीके और समय के अनुसार अपने आपको अपडेट किया जाये और कुछ नया सिखा जाये,
बदलाव का कदम थोड़ा तकलीफ भरा जरूर है लेकिन रुको और देखो वाली प्रकिया के बाद यह कदम आपकी असफलता (Failure) को सफलता (Success) में बदल देगा।
असल ज़िन्दगी तब जी जाती है जब छोटे-छोटे बदलाव होते हैं – लियो टॉलस्टॉय
उपरोक्त तीन कदम हम सब की जिंदगी से जुड़े हुए है और हम अपनी बड़ी से बड़ी समस्या या चुनौती को पार पा सकते है,
इसलिए कहा गया है की ज्ञान अर्जित करने से नहीं बढ़ता, ज्ञान तो उपयोग करने से बढ़ता है, और ये ज्ञान प्रकृति का है की कोई भी समस्या का समाधान आसान है यदि आप निश्चिंत होकर सोचे और ये तीन कदमों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना ले ।
इसलिए रुको… क्योंकि रुकने से तुम  जुड़ जाओगे अपने साथ, सोचो… क्योंकि सोचने से जिंदगी का असली ज्ञान तुम्हें गाइड करेगा और बदलो… क्योंकि बदलाव प्रकृति का नियम है और बदलने से ही तुम सफलता (Success) को  प्राप्त करोगे ।
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Wednesday, 2 November 2016

Learn to appreciate.....by Ratnesh Yadav

Once upon a time, there was a man who was very helpful, kindhearted, and generous. He was a man who will help someone without asking anything to pay him back. He will help someone because he wants to and he loves to. One day while walking into a dusty road, this man saw a purse, so he picked it up and noticed that the purse was empty. Suddenly a woman with a policeman shows up and gets him arrested.
The woman kept on asking where did he hide her money but the man replied, “It was empty when I found it, Mam.” The woman yelled at him, “Please give it back, It’s for my son’s school fees.” The man noticed that the woman really felt sad, so he handed all his money. He could say that the woman was a single mother. The man said, “Take these, sorry for the inconvenience.” The woman left and policeman held he man for further questioning.
                  The woman was very happy but when she counted her money later on, it was doubled, she was shocked. One day while woman was going to pay her son’s school fees towards the school, she noticed that some skinny man was walking behind her. She thought that he may rob her, so she approached a policeman standing nearby. He was the same policeman, who she took along to inquire about her purse. The woman told him about the man following her, but suddenly they saw that man collapsing. They ran at him, and saw that he was the same man whom they arrested few days back for stealing a purse.
                   He looked very weak and woman was confused. The policeman said to the woman, “He didn’t return your money, he gave you his money that day. He wasn’t the thief but hearing about you son’s school fees, he felt sad and gave you his money.” Later, they helped man stand up, and man told the woman, “Please go ahead and pay your son’s school fees, I saw you and followed you to be sure that no one steals your son’s school fees.” The woman was speechless.

Moral: Life gives you strange experiences, sometime it shocks you and sometimes it may surprise you. We end up making wrong judgments or mistakes in our anger, desperation and frustration. However, when you get a second chance, correct your mistakes and return the favor. Be Kind and Generous. Learn to Appreciate what you are given.

                                                               RATNESH YADAV
        

                                                                            click here to read and more

Tuesday, 1 November 2016

All about PM Narendra Modi......Ratnesh Yadav

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री “नरेन्द्र मोदी जी” आज भारत के सबसे ज्यादा चर्चित व्यक्ति हैं। केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनके नाम के अनेकों प्रसंशक हैं।

         माननीय नरेन्द्र दामोदरदास मोदी (पूरा नाम) भारत के 15 वें प्रधानमंत्री हैं एवं ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म स्वतंत्र भारत (यानि 1947 के बाद) में हुआ।

          नरेन्द्र मोदी जी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को गुजरात के मेहसाना जिले में वडनगर नाम के कस्बे में हुआ। पिता दामोदर दास मोदी और माँ हीराबेन के 6 बच्चों में से ये तीसरे नंबर के थे। इनके घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। माँ दूसरों के घर में जाकर बर्तन साफ़ करती थी और पिता की एक छोटी सी चाय की दुकान थी। एक कच्चे मकान में पूरा परिवार रहता था। गरीबी के कारण दो वक्त का खाना भी सही से नसीब नहीं होता था। संघर्ष भरे माहौल में मोदी जी ने बहुत छोटी उम्र में ही जीवन के कई ऊँचे नीचे पड़ाव देख लिए थे। बचपन से ही इनको पढाई लिखाई का बेहद शौक था। यूँ तो ये पिता के साथ चाय की दुकान पर हाथ बंटाया करते थे लेकिन जब भी मौका मिलता ये पुस्तकालय जाकर घण्टों पढ़ाई करते। ये बचपन से ही स्वामी विवेकानंद एवं उनके विचारों को अपना आदर्श मानते थे। 13 वर्ष की आयु में नरेन्द्र की सगाई जसोदा बेन चमनलाल के साथ कर दी गयी। लेकिन कुछ पारिवारिक समस्याओं के कारण 1967 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में ही ये घर छोड़ कर चले गए। ये घर छोड़कर उत्तरी भारत में स्थित स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित हिन्दू आश्रम एवं कोलकाता के बेलूर मठ ऐसे ही कई आश्रामों का भृमण करने लगे। इन्हीं दिनों में इन्होंने जीवन को गहराई से जाना अपनी सोच को सुधारा और करीब 2 साल बाद फिर से वापस घर आ गए।

               इसके बाद मोदी जी आर.एस.एस. (R.S.S.) के सदस्य बने और पूरी मेहनत से आर.एस.एस. के लिए काम करने लगे। इतनी व्यस्तता के बावजूद मोदी जी पढाई करना नहीं छोड़ा और राजनीति विज्ञान में डिग्री प्राप्त की। वो दिन रात लोगों की सेवा करते लोगों से जुड़ते और उनकी समस्या को करीब से जानने की कोशिश करते।

             1975 में भारत में राजनैतिक झगडे चल रहे थे तो उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने कई राज्यों में आपातकाल घोषित कर दिया और आर.एस.एस. संस्था को बंद करने को कहा लेकिन मोदी जी फिर भी गुप्त रूप से लोगों की सेवा में लगे रहे और आर.एस.एस. का प्रचार चलता रहा। उनके इस काम से खुश होकर उनको भाजपा में शामिल किया गया।

              2001 में गुजरात में भयंकर भूकंप आया जिसकी वजह से गुजरात को बहुत नुकसान झेलना पड़ा। उस समय की सरकार के राहत कार्य से नाखुश होकर भाजपा वालों ने मोदी जी को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया। मोदी ने उस भूकंप से गुजरात को उबारने में जी तोड़ मेहनत की और वे सफल भी हो गये और लोकप्रिय हो गए। गुजरात की जनता ने भी उनको लगातार चार बार मुख्यमंत्री चुनकर भारत के सबसे बेहतर मुख्यमंत्रीयों में शामिल कर दिया।

            इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में भाजपा ने मोदी को उतारा और पूरे भारत में मोदी के नाम की लहार इतनी तेजी से दौड़ रही थी कि काफी लोगों ने पहले ही मोदी को प्रधानमंत्री मान लिया। खासकर युवाओं ने मोदी को विशेष प्रोत्साहन दिया।
           उनके नेतृत्व में भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा और 282 सीटें जीतकर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमन्त्री पद की शपथ दिलायी और आज वे स्वतन्त्र भारत के 15वें प्रधानमन्त्री हैं और कुशलता पूर्वक भारत की सेवा कर रहे हैं।

मोदी जी की कुछ प्रमुख योजनाएं –
धन योजना
स्वच्छ भारत अभियान
मेक इन इंडिया
डिजिटल इंडिया

मोदी जी के जीवन से जुडी कुछ दिलचस्प जानकारियां –
1. मोदी जी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म स्वतन्त्र भारत में हुआ
2. सोशल मिडिया पर सबसे ज्यादा पॉपुलर इंसान हैं मोदी जी
3. गुजरात की राजधानी गांधीनगर एशिया की Greenest Capital City में है
4. मोदी बचपन में पिता के साथ चाय बेचते थे
5. मोदी जी स्वामी विवेकानंद से बेहद प्रभावित हैं
6. मोदी बचपन से बहादुर थे एक बार मगरमच्छ का बच्चा हाथ में उठा लाये थे
7. बचपन से ही नाटकों और भाषणों में हिस्सा लेते थे
8. मात्र 13 साल की उम्र में इनकी शादी हो गयी थी
9. मोदी जी रोजाना योगा करते हैं फिर चाहे वो कहीं भी हों
10. वे रोजाना 18 घंटे काम करते हैं केवल कुछ ही घंटे सोते हैं
11. मोदी जी ने अपने 2 साल के कार्यकाल में अभी तक कोई छुट्टी नहीं ली है।

ऐसे हैं हमारे देश भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, आज हर बच्चा बच्चा मोदी जी को जानता है और युवाओं की वो हमेशा से ही पहली पसंद रहे हैं। तो आइये हम भी अपने वर्तमान प्रधानमंत्री को बढ़ावा दें और भारत को विश्व में उच्च स्थान दिलाने की कोशिश करें।

60 हिंदी पहेलियों का दुर्लभ संग्रह! Collection of Hindi Paheliyan with Answers!

पहेलियाँ Dosto Apne Answers ko comment mein Serial no Likh kr batayein.. 1 गोल है पर गेंद नहीं, पूँछ है पर पशु नहीं । पूंछ पकड़कर खेलें बच्चे...